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| लंबे समय तक अनकंट्रोल्ड ब्लड शुगर शरीर के कई अंगों को धीरे-धीरे नुकसान पहुँचाती है। |
यह नुकसान एक-दो दिन या हफ्तों में नहीं, बल्कि सालों में सामने आता है — जब तक लक्षण दिखते हैं, तब तक कई अंग प्रभावित हो चुके होते हैं। इसी वजह से डॉक्टर इसे “साइलेंट डैमेज” भी कहते हैं।
बढ़ी हुई ब्लड शुगर शरीर को नुकसान कैसे पहुँचाती है?
जब लंबे समय तक खून में ग्लूकोज़ का स्तर ज़्यादा रहता है, तो यह:
नसों की अंदरूनी परत को नुकसान पहुँचाता है
सूजन (Inflammation) बढ़ाता है
छोटी और बड़ी रक्त वाहिकाओं को धीरे-धीरे खराब करता है
इसी आधार पर डायबिटीज़ से होने वाले नुकसान को दो भागों में बाँटा जाता है:
👉 माइक्रोवैस्कुलर (Microvascular) जटिलताएँ
👉 मैक्रोवैस्कुलर (Macrovascular) जटिलताएँ
🧠 माइक्रोवैस्कुलर जटिलताएँ (छोटी नसों को नुकसान)
ये जटिलताएँ शरीर की छोटी रक्त वाहिकाओं को प्रभावित करती हैं।
1️⃣ 👁️ आँखों पर असर (डायबिटिक रेटिनोपैथी)
आँखों की नसें कमजोर होने लगती हैं
धुंधला दिखना
समय पर इलाज न हो तो दृष्टि हानि तक का खतरा
2️⃣ 🩺 किडनी पर असर (डायबिटिक नेफ्रोपैथी)
किडनी की फिल्टर करने की क्षमता कम होती है
पेशाब में प्रोटीन आना
आगे चलकर किडनी फेल होने का जोखिम
3️⃣ 🦶 नसों को नुकसान (डायबिटिक न्यूरोपैथी)
पैरों में जलन, झनझनाहट
सुन्नपन या दर्द
घाव का देर से भरना, इंफेक्शन का खतरा
👉 यही कारण है कि डायबिटीज़ में पैरों की देखभाल पर ज़ोर दिया जाता है।
❤️ मैक्रोवैस्कुलर जटिलताएँ (बड़ी नसों को नुकसान)
लंबे समय तक बढ़ी शुगर बड़ी धमनियों को भी प्रभावित करती है।
1️⃣ 💔 हार्ट डिज़ीज़
कोरोनरी आर्टरी डिज़ीज़
हार्ट अटैक का जोखिम
हाई ब्लड प्रेशर के साथ खतरा और बढ़ जाता है
2️⃣ 🧠 स्ट्रोक का खतरा
दिमाग तक जाने वाली नसों में रुकावट
अचानक कमजोरी, बोलने में परेशानी
लंबे समय तक विकलांगता का जोखिम
3️⃣ 🚶♂️ पैरों की नसों में रुकावट
चलने पर दर्द
पैरों में ठंडापन
गंभीर मामलों में गैंग्रीन का खतरा
⚠️ क्यों यह नुकसान “धीरे-धीरे” होता है?
क्योंकि:
शुरुआत में कोई तेज़ लक्षण नहीं होते
शरीर कुछ समय तक एडजस्ट करता रहता है
नुकसान अंदर ही अंदर बढ़ता रहता है
👉 जब तक लक्षण दिखते हैं, तब तक समस्या काफी आगे बढ़ चुकी होती है।
🧪 किन लोगों को ज़्यादा सावधान रहना चाहिए?
जिनकी ब्लड शुगर लंबे समय से कंट्रोल में नहीं है
प्रीडायबिटीज़ को नज़रअंदाज़ करने वाले लोग
हाई ब्लड प्रेशर या कोलेस्ट्रॉल वाले मरीज
इन लोगों में जटिलताओं का जोखिम ज़्यादा होता है।
✅ नुकसान से बचने के लिए क्या करें?
✔️ ज़रूरी कदम:
नियमित ब्लड शुगर जांच
HbA1c की समय-समय पर जांच
संतुलित आहार और नियमित व्यायाम
डॉक्टर की सलाह से दवा और फॉलो-अप
❌ क्या न करें:
“कुछ नहीं हो रहा” सोचकर लापरवाही
जांच और दवाओं में गैप
लक्षणों को नज़रअंदाज़ करना
❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
Q1. क्या शुगर कंट्रोल करने से यह नुकसान रुक सकता है?
हां, समय पर और लगातार कंट्रोल से जटिलताओं की रफ्तार धीमी की जा सकती है।
Q2. क्या एक बार नुकसान हो जाए तो ठीक नहीं होता?
कुछ नुकसान स्थायी हो सकते हैं, लेकिन कई मामलों में स्थिति को बिगड़ने से रोका जा सकता है।
Q3. क्या सिर्फ दवा से कंट्रोल काफी है?
नहीं, दवा के साथ लाइफस्टाइल बदलाव भी उतने ही ज़रूरी हैं।
🟢 अंतिम बात
लंबे समय तक बढ़ी ब्लड शुगर सिर्फ “नंबर” की समस्या नहीं है —
यह आँख, किडनी, नसों और दिल सभी को धीरे-धीरे प्रभावित करती है।
समय पर कंट्रोल = जटिलताओं से बचाव = बेहतर जीवन।
👇 नीचे कमेंट में बताइए —
क्या आप अपनी ब्लड शुगर और HbA1c की नियमित जांच करवाते हैं?


